आरती

आरती

जय हरिदास हरे, बाबा जय हरिदास हरे।

पायक जनों के संकट, क्षण में दूर करे।।

जे सुमरे सो पार तरे, दुःख नष्ट होय मन के।

सद्बुद्धि मिले भक्तों को, त्रिताप मिटे जन के।।

दीनबन्धु सखा और स्वामी, तुम सम नहीं दूजा।

ठौर कहीं नहीं और मुझे है, स्वीकार करो पूजा।।

तुम हो रिद्धि-सिद्धि पूर्ण, सब के दुःख हर्त्ता।।

दीन दयालु हे कृपालु, शरण हमें दीजे।

पा करके कृपा तुम्हारी, भव बन्धन छीजै।।

तुम ही भक्त जगत में आए, बन सबके हितकारी।

ये बने राम के सभी सारथी, सब सुख भण्डारी।।

हरि चित ला जो आरती गावे, पार लगे खेवा।

अर्थ समझ केजो नर ध्यावे, पावे फल मेवा।।

हे सन्त शिरोमणि ज्ञान निधि। हे परम भगत हरिदास नमः।

मद काम क्रोध लोभादी रहित। हे तप निधि तेज निवास नमः।

धन धरणी देह धाम तज कर। हुए जीवन मुक्त राम भज कर।।

रट ईशवर सुबहै शाम राज कर। नई मेट विकट यम त्रास नमः।।

हे सन्त शिरोमणि ज्ञान निधि। हे परम भगत हरिदास नमः।

मन क्रम वाणी तज माया को। जन शरण तुम्हारी आया जो।।

कर दरश अभय पद पाया सो। सन्तत सुख पुर मैं बास नमः।।

हे सन्त शिरोमणि ज्ञान निधि। हे परम भगत हरिदास नमः।।2।।

निझ इच्छा नर तन धारण किया। वसुधा का पाप निवारण किया।।

प्रभु नाम नित उच्चारण किया। लिए काट जन्म यम फांस नमः।।

हे सन्त शिरोमणि ज्ञान निधि। हे परम भगत इतिहास नमः।।3।।

तज कर भव बाधा सारी को। रटते दिन रात मुरारी को।।

इस डूंगर दत्त ब्रह्मचारी को। दियो पूरण ज्ञान प्रकाश नमः।।

हे सन्त शिरोमणि ज्ञान निधि। हे परम भगत हरिदास नमः।।

मद काम क्रोध लोभादी रहिता। हे तप निधि तेज निवास नमः।।

 

।। मन्त्र ।।

ॐ श्री हरिदास हरिदासाय नमः

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